कुंठा
...तुम्हारी आकुलताएँ, व्यग्रताएँ मैं नहीं जानता और, अनुमान कर के भी मानना नहीं चाहता ! इस प्रकार अपने अहम् को तुष्ट कर, किन्तु अगले ही क्षण इसे जड़ता मानकर कुंठित हुआ जाता हूँ लुंठित हुआ जाता हूँ...!
आज नहीं कल सही, कल नहीं युग-युग बाद ही...